भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

और

वि.
अधिक, ज्यादा।

औरस

वि.
[सं.]
जो संतान विवाहिता पत्नी से उत्पन्न हो।
मैं हूँ अपनेैं औरस पूतैं बहुत दिननि मैं पायौ–१०-३३९।

औरसना

क्रि. अ.
[सं. अव = बुरा + रस]
नष्ट होना, उदासीन होना।

औरासा

पुं.

वि.
[हिं. औरसना]
विचित्र, बेढंगा।

औरासी

वि.
[हिं. औरसना]
रुष्ट, उदासीन।

औरासी

वि.
विचित्र, बेढंगा।
बिसरो सूर बिरह दुख अपनो अब चली चाल औरासी-२८७७।

औरेब

पुं.

संज्ञा
[सं. अव = विरुद्ध या उलटी + रेव = गति]
तिरछी चाल।

औरेब

पुं.

संज्ञा
[सं. अव = विरुद्ध या उलटी + रेव = गति]
चाल भरी बातें, छल-कपट की घात।

औरै

नि. सवि.
[हिं. और]
और को, दूसरे को।
कृपन, सूम, नहिं खाइ खवावैं, खाइ मारि के औरै.–१-१८६।

औरौ

वि.
[हिं. और]
और भी, अन्य, अनेक।
(क) जो प्रभु अजामील कौ दीन्हों, सो पाटाै लिखि पाऊँ। तौ बिस्वास होइ मन मेरैं, औरौ पतित बुलाऊँ-१-१४६।
(ख) अबहिं निवछरौ समय, सुचित ह्वै, हम तो निरधक कीजे। औरौ आइ निकसिहैं तातैं, आगैं हैं सो कीजै-१-१९१।

औरौ

वि.
[हिं. और]
अन्य, दूसरा।
औरौ दँडदाता दोउ आहि। हम सौं क्यौं न बतावो ताहि-६.४।

औलना

क्रि. अ.
[हिं. जलना]
गरमी पड़ना, तप्त होना।

औषध

स्त्री.

संज्ञा
[सं.]
रोग दूर करने की वस्तु, दवा।
बिन जानैं कोउ औषध खाइ। ताकौ रोग सफल नसि जाइ—६-४।

औषधि, औषधी

स्त्री.

संज्ञा
[सं. औषध]
दवा, औषधि।
तुम दरसन इक बार मनोहर, यह औषधि इक सखी लखाई-७४८।

औसर

पुं.

संज्ञा
[सं. अवसर]
समय, काल।
(क) हरि सौं मीत न देख्यौ कोई। विपति काल सुमिरत तिहिं औसर आनि तिरीछौ होई–१-१०।
(ख) गए न प्रान सूरता औसर नंद जतन करि रहे घनेरो-२५३२।

औसर

मुहा.
औसर हारयौ :- मौका चूक गये। उ.-औसर हारयौ रे तैं हारयौ। मानुष-जनम पाइ नर बौरे, हरि को भजन बिसरायाै–१-३३६।

औसान

संज्ञा
[सं. अवसान]
अंत।

औसान

संज्ञा
[सं. अवसान]
परिणाम।
जेहि तन गोकुलनाथ भज्यौ। ऊधो हरि बिछुरत ते बिरहिनि सो तनु त बहिं नज्यो। अब औसान घटत कहि कैसे उपजी मन परतीति।

औसान

पुं.

संज्ञा
सुध-बुध, धैर्य।
सुरसरि-सुवन रन भूमि आए। बान वर्षा लागे करन अति क्रोध ह्वै पार्थं औसान (अवसान) तब सब भुलाए—१-२७३।

औसाना

क्रि. स.
[हिं. औसाना]
फल पाल में रखकर पकाना

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